खेल एवं युवा कल्याण विभाग छत्तीसगढ
::खेल नीति 2001::
(अ) लक्ष्य
खेल नीति का लक्ष्य है कि, खेल संस्कृति का सृजन हो तथा खेलों से संबंधित सभी योजनाओं एवं कार्यक्रमों का क्रियान्वयन ग्राम पंचायत स्तर से हो।
(ब) नीति
राज्य में खेल सुविधाओं के सृजन हेतु युवा कार्यक्रम एवं खेल विभाग, भारत सरकार की आथिर्क सहायता संबंधी योजना का पूर्व लाभ लिया जाएगा तथा केन्द्र शासन द्वारा स्वीकृत प्रस्तावों पर राज्य शासन अपना वित्तीय अंश वहन करेगा । इसके अतिरिक्त सार्वजनिक उद्योंगो, अर्द्धशासकीय संस्थाओं, निजी संस्थाओं तथा उद्योगपतियों को वित्तीय भार वहन करने हेतु प्रेरित किया जाएगा।
ग्राम पंचायत स्तर पर लोकप्रिय खेल का मैदान तैयार किया जाएगा तथा ग्रामीण क्रीड़ा केन्द्रों का गठन किया जाकर खेलों का नियमित अभ्यास प्रारंभ किया जाएगा।
विकासखण्ड स्तर पर उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में खेल मैदान का निर्माण केन्द्रीय अनुदान योजना के तहत किया जाएगा।
जिला मुख्यालयों में जिला खेल परिसर एवं राजधानी में राज्य खेल प्रशिक्षण परिसर का निर्माण केन्द्रीय अनुदान प्राप्त करने किया जाएगा ।
नई आवासीय कालोनियां विकसित करने के पूर्व उसका नक्शा स्वीकृत करते समय ही उसमें कम से कम प्रमाणित आकार 200 ग 150मी- का स्थान खेल मैदान हेतु सुरक्षित किया जाना सुनिश्चत किए जाने एवं कालोनी निर्माण के समय खेल मैदान में निवेश करने आवश्यक बनाने के लिए सम्बद्ध कानूनों में समुचित प्रावधान हेतु पहल की जाएगी।
राज्य में उपलब्ध खेल सुविधाओं, खेल मैदानों, खेल के योग्य खुले मैदानों को सर्वेक्षण कराया जाएगा एवं इन्हें खेल मैदान के रूप में चिन्हित किया जाकर सुरक्षित रखने हेतु कार्यवाही की जाएगी ।
विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में खेल मैदान हेतु स्थान निर्धारण किया जाएगा।
निजी क्षेत्र के उद्यमों को भी अपने आवासीय परिसर आदि में खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु प्रेरित किया जाएगा।
जिला, राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर की आफिशियल चैम्पियनशिप आयोजन के लिए सूचीबद्ध खेलों के मान्यता प्राप्त खेल संगठनों/संस्थाओं को आथिर्क सहायता दी जाएगी। राष्ट्रीय स्तर की आफिशियल चैम्पियनशिप में भाग लेने हेतु मान्यता प्राप्त खेल संघों द्वारा चयनित राज्य के खिलाडियों को यात्रा व्यय प्रदान किया जाएगा । इस हेतु अनुदान नियम बनाए जाएंगे । प्रदाय की जाने वाली आथिर्क सहायता का लाभ राज्य के खिलाडियों को प्राप्त हो इस उद्देश्य से जिला तथा राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के आयोजन तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भागीदारी को प्रथम प्राथमिकता दी जाएगी तत्पश्चात अखिल भारतीय आमंत्रण प्रतियोगिता के आयोजन हेतु अनुदान स्वीकृति को प्राथमिकता बजट आंबटन उपलब्ध रहने पर दी जाएगी।
राज्य में भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रशिक्षण केन्द्र अधिकाधिक संख्या में प्रारंभ करने तथा राज्य में प्राधिकरण के प्रशिक्षकों को अधिकाधिक संख्या में पदस्थ करने हेतु पहल की जाएगी ।
राज्य शासन द्वारा प्रतिभाशाली खिलाडियों के लिए छात्रावास योजना प्रारंभ की जाएगी एवं एन.आई.एस. डिप्लोमाधारी प्रशिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
शासन के विभिन्न विभाग जो खले विकास में कार्य कर रहे हैं उनके सम्मिलित प्रयास की रूपरेखा तैयार की जाएगी ताकि सामूहिक प्रयास से जल्दी एवं अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकें।
जनजाति क्षेत्रों में पूर्व से संचालित क्रीडा परिसरों को पुर्नसंयोजन किया जाने हेतु पहल की जाएगी तथा इनमें वैज्ञानिक खेल प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी।
विभिन्न स्थानों में खेलों के नियमित प्रशिक्षण हेतु शासकीय सेवा में नियुक्त उपलब्धिधारी, वेटरन खिलाड़ी, सेवानिवृत्त प्रशिक्षकों की सेवाएं प्राप्त की जाएगी ।
शासकीय सेवा में नियुक्त योग्य एवं युवा व्यायाम निदेशकों को विभिन्न खेलों मे एन.आई.एस. डिप्लोमा प्राप्त करने हेतु भेजा जाएगा ।
खेल से जूडे तकनीकी ज्ञान में वृद्धि हेतु ग्रीष्मकालीन एन.आई.एस. सर्टिफिकेट कोर्स राज्य में प्रारंभ किए जाने हेतु राष्ट्रीय खेल संस्थान से पहल की जाएगी।
ओलम्पिक मेडल गेम्स जो वर्तमान में राज्य में प्रारंभ नहीं हो सके हैं, उनके तकनीकी ज्ञान एवं प्रशिक्षण के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण से विशेषज्ञों की अल्पकालीन सेवाएं प्राप्त की जाएगी तथा राज्य में इन खेलों में विशेषज्ञ तैयार किए जाएंगे ।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में ओलम्पिक मेडल गेम्स में सम्मिलित व्यक्तिगत खेलों की ओर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
प्राथमिक शालाओं में शारीरिक गतिविधियां एवं शारीरिक शिक्षा की व्यवस्था हेतु पूर्व में पदस्थ शिक्षक को ही खेल शिक्षक के रूप में तैयार किया जाने हेतु पहल की जाएगी।
प्रत्येक जिला मुख्यालय एवं चिन्हित विकासखण्ड मुख्यालय में विद्यालयीन ग्रीष्मावकाश में ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर आयोजन किया जाएगा ।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने के पूर्व खिलाडि़यों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे इस हेतु खेल संघो, विद्यालयों, विश्वविद्यालयों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
ग्रामीण शहरी एवं जनजाति क्षेत्रों में छिपी हुई प्रतिभा की खोज की जाएगी एवं उन्हें प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
पूर्व माध्यमिक, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में संस्था के विद्याथिर्यों को चार समूहों में विभाजित कर अंतर्दलीय प्रतियोगिता आयोजन समय-समय पर किया जाए इस हेतु योजना तैयार कर क्रियान्वित किए जाने का प्रयास किया जाएगा।
महाविद्यायलों में वर्ष में एक बार अनिवार्य खेल उत्सव आयोजित किया जाए एवं इसके विजयी खिलाड़ी को महाविद्यालय चैम्पियन घोषित किया जाए इस हेतु योजना बनाई जाएगी ।
प्रत्येक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में योग प्रशिक्षण की व्यवस्था का यह प्रयास किया जाएगा।
विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शारीरिक शिक्षा अध्यापन का विषय हो इस हेतु पहल की जाएगी।
खेल वातावरण के सृजन हेतु प्रचार माध्यमों का अधिकाधिक उपयोग किया जाएगा।
ऎसे खेल जिनसे संबंधित खेल संघ या संस्थाएं अस्तित्व में नहीं है या जिनका विधिवत गठन नहीं हुआ है उनके गठन हेतु आवश्यक पहल की जाएगी।
इन्टर क्लब प्रतियोगिताओं को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
ग्राम पंचायत स्तर तक सूचना भेजने के लिए नोडल केन्द्र का निर्धारण किया जाना होगा प्रारंभिक तौर पर विकासखण्ड मुख्यालय में स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय या क्रीड़ा केन्द्र को नोडल केन्द्र के रूप में चिन्हित कर खेल संबंधी सूचनाएं भेजी जाएगी।
खेल वातावरण सृजन हेतु परम्परागत एवं अपेक्षाकृत कम अधोसरंचना मांग वाले खेलों को ग्रामीण अंचलों में खेल संस्थाओं के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाएगा।
निम्नांकित प्रतियोगिताओं के आयोजन की रूपरेखा तैयार की जाएगी:-
अधिकृत एवं मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताओं के पूर्व आयोजित होने वाले खेल प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने वाले खिलाडियों को विद्यालयों/ महाविद्यालयों की उपस्थिति में रियायत देने हेतु निर्देश जारी करने के लिए पहल की जाएगी।
विभिन्न खेल मैदानों के इन्डोर हाल के लिए प्रकाश व्यवस्था हेतु विद्युत प्रदाय रियायती दरों पर उपलब्ध कराने हेतु पहल की जाएगी।
शासकीय या अर्द्धशासकीय सेवा में कार्यरत जो खिलाड़ी जिला/ राज्य/ राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग ले रहें हो उन्हें प्रतियोगिता आयोजन अवधि में कर्तव्य में माना जाए
राज्य दल में खेलने वाले खिलाडि़यों के माता/पिता यदि शासकीय सेवक हैं तो उन्हें उनकी सुविधानुसार यथा संभव ऎसे स्थान पर पदस्थ किया जाएगा जहां खिलाड़ी को प्रशिक्षण की अच्छी सुविधा हों।
शासकीय सेवा में कार्यरत ऎसे अभिभावक जिनके बच्चे अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हो या राष्टीय प्रतियोगिता में पदक प्राप्त कर रहे हो। उन्हें यथा संभव शासकीय आवास आबंटित करते समय प्राथमिकता दिए जाने के निर्देश जारी करवाए जाएंगे।
यदि कोई शासकीय कर्मचारी राष्टीय स्तर पर अधिकृत एवं मान्यता प्राप्त प्रतियोगिता में पदक प्राप्त करता है तो उसे इस हेतु अतिरिक्त वेतन वृद्धि प्रदान की जाएगी।
अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी या राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त खिलाडि़यों के नाम जिले के विशिष्ठ व्यक्तियों की सूची में सम्मिलित किए जाएंगे।
राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त खिलाडियों को अव्यावसायिक शैक्षणिक पाठ्यक्रम एवं छात्रावास में प्रवेश हेतु बिना गुणात्मक से प्रवेश दिया जाएगा। व्यवसायिक पाठ्यक्रमो में प्रवेश के लिए उन्हें प्राप्त अंकों में 10 प्रतिशत बोनस अंक प्रदान करने हेतु विचार कर पहल की जाएगी।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने, राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त करने या राज्य का अनेक बार प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाडि़यों केा आजीवन सम्मान निधि प्रदान की जाएगी।
अंर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने, राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त करने या राज्य का अनेक बार प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाडि़यों को शासकीय सेवा में नियुक्ति दिए जाने एवं इस हेतु आयु सीमा में छूट दिए जाने हेतु नियम बनाए जाएंगे। प्रशिक्षकों एवं निर्णायकों को भी पुरस्कृत किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाडि़यों को खेल वृत्ति प्रदान करने हेतु नियम बनाए जाएंगे ।
छत्तीसगढ क्रीड़ा परिषद का गठन किया जाएगा।
विभागीय संचालनालय में स्पोर्टस म्यूजियम, स्पोर्टस लाईब्रेरी की स्थापना, राज्य के चिकित्सा महाविद्यालयों में स्पोर्ट्स मेडिसन एवं स्पोर्ट्स साईकोलाजिस्ट की उपलब्धता पर जोर दिया जाएगा।
औद्योगिक/व्यवसायिक निगमों से आग्रह किया जाएगा कि कम से कम एक खेल को गोद लेवे ।
राज्य में शारीरिक शिक्षा तथा खेल साहित्य सृजन तथा शारीरिक शिक्षा में शोधकर्ता को प्रोत्साहन दिया जाएगा ।
खेल नीति में उल्लेखित, नीति निदेशक तत्वों के लिए जहां आवश्यक होगा नियम बनाया जाएगा। खेल नीति का क्रियान्वयन राज्य की वित्तीय स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए इस प्रकार से किया जाएगा, जिसमें वित्त विभाग को आपत्ति न हो।
खेल नीति क्रियान्वयन की एक वर्ष बाद समीक्षा की जाएगी तथा पांच वर्ष बाद नीति परिणाम पर समीक्षा की जाकर इसमें आवश्यक परिवर्तन किया जाएगा।